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मीडिया में फिरकापरस्ती और फसादी प्रोपेगेण्डा के बारे में मुसलमान का अमल कैसे हो।

सबक फिर पाठ सदाकत का, अदालत का, सुजात का दिया जाएगा,

और लिया जाएगा तुझसे, काम दुनिया को इमामत का।

(इकबाल)

हालिया अरसें में मीडिया (सहाफत) पर जहरीली हवा (झूठे प्रोपेगेण्डा) के सहारे चन्द सरकसी, सरपसन्द, फसादी, फिरकापरस्त लोग इंसानी समाज में फूट और नफरत के बीज बो रहे है जिससे कि फसादत की चिंगारी फैलने का खतरा है। इन झूठी खबरों और अफवाहों की वजह से आवाम कशमश में रहता है और कभीकभी गुमराह होकर मुल्क में अमन के खिलाफ चलाए जाने वाले ऐसे शरारती तत्वों के बहकावें में आ जाता है। ऐसे समय में एक सच्चे और मज़हबी इखलाक वाले मुसलमान को इस्लामी तालिम की रोशनी में मुल्क की हिफाजत और लोगों के बीच भाईचारे को बनाए रखने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए। कुरान मजीद और अहदीसों में साफसाफ बताया गया है कि एक सच्चे मोमिन को झूठे प्रोपेगेण्डा से नहीं बरगलाया जा सकता।

ऐ ईमान वालो अगर तुम्हारे पास कोई खबर लाये और तुम्हे इसकी सच्चाई पर अन्देशा हो तो इसकी खूब तहकीकात कर लिया करो। ऐसा न हो कि तुम इनसे गफलत में आकर किसी और इंसान कौम को जरार या तकलीफ़ पहुँचाने का कारण बनों और बाद में पछताते रहो क्योंकि यह एक खुलाखुला गुनाह है” । (अल हजरा 6)

बन्दों को मेरा हुक्म है कि वो कभी भी शक, शैतानियत या फितनाई बातों पर गौर न करे और उम्दाउम्दा काम करें क्योंकि फितनापरस्त शैतान इन्सान का बहुत बड़ा दुश्मन होता है” । (बानी इजराइल 53)

कुरान हदीस से मोमिनों को यह तालीम और ताकीद है कि वे बिना तहकीकात किसी खबर पर एतमाद न करें।

आज जबकि हमारे मुल्क में ऐसी झूठी खबरों को फैलाकर कुछ फिरकापरस्त लोग फसाद पैदा करना चाहते हैं, हम सब सावधान रहें क्योंकि यह ज़हर खुरेंजी है और इंसानियत और मुल्क के लिए एक बड़ा खतरा।

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