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अतिवाद विरोधी लेख निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर मनाई जाती है बसंत पंचमी

700 साल से लगातार हजरत ख्‍वाजा निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर सदियों से मनाया जा रहा बसंत उत्‍सव इस साल भी धूमधाम से मानाया गया। बसंतोत्‍सव को दरगाह में देखने के लिए तमाम अलग-अलग जगहों से पीले पोशाक में लोग भी पहुँचे और मज़ार में पीले फूल और पीली चादर चढ़ाई। लोग भी दरगाह में बसंत के रंगों को देखकर काफ़ी खुश नजर आए। लोगों ने खूबसूरत कव्‍वाली के साथ अपनी शाम दरगाह में गुजारी इस रंगारंग त्‍योहार की सभी मजहबों को लोगों ने अपने चिश्‍ती शाह की याद में पूरे मेल-मिलाप और उत्‍साह से मनाया।

कहा जाता है निज़ामुद्दीन औलिया अपने भांजे के गुजर जाने के बाद बेहद गमगीन थे। बसंत के मौके पर हज़रत अमीर खुसरों ने कुछ औरतों को गाना गाते और पीले फूल पीली पोशकों में जाते देखा तो खुसरों ने भी ऐसा रूप धारण कर हजरत निज़ामुद्दीन औलिया के सामने गाना गाया जो निज़ामुद्दीन औलिया के चेहरे पर मुस्‍कुराहट ले आया। जिसके बाद साढ़े 700 साल से लगातार हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह पर बसंत का उत्‍सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसलिए हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह सांप्रदायिक सौहार्द की निशानी मानी जाती है।

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