Breaking News
Home / Blog / इस्‍लामसिर्फ ‘मजहब’ हीनहींबल्किजीनेकाएकढंगभीहै

इस्‍लामसिर्फ ‘मजहब’ हीनहींबल्किजीनेकाएकढंगभीहै

इस्‍लाम जात-पात, नस्‍ल, भाषा और मजहब को दरकिनार करते हुए समानता में विश्‍वास करता है और लोकतांत्रिक व मजहबी निरपेक्ष व्‍यवस्‍था के लिए एक मंच उपलब्‍ध कराता है। यह मनुष्‍य जाति को अमन के साथ रहने के लिए अपने दरवाजे खोलता है और जोर-जबरदस्‍ती तथा जबरन मजहब परिवर्तन से परहेज करता है। जैसा कि कुरान में कहा गया है कि ‘मानवता का जन्‍म सिर्फ और सिर्फ एक जोड़े से हुआ है।’ इस्‍लाम के अनुसार ‘प्रत्‍येक ईमान वाले को विश्‍वसनीयता, पड़ोसियों के प्रति सम्‍मान व गरीबों तथा दबे-कुचलों पर ध्‍यान देने की जरूरत है।’ यह मजहब लोकतांत्रिक व संवैधानिक रूप से चुनी सरकारों के खिलाफ विद्रोह करने की इजाजत नहीं देता। सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए इस्‍लाम में सर्वश्रेष्‍ठ न्‍यायिक व्‍यवस्‍था है जो दुश्‍मनों को भी बिना मजहबी भेदभाव या उसकी सामाजिक प्रतिष्‍ठा के न्‍याय दिलवाने पर जोर देती है। ऐसा करना अल्‍लाह के प्रति आस्‍था व्‍यक्‍त करने के बराबर है। अल्‍लाह सभी पर नजर रखता है इसलिए गरीब या अमीर सभी को सतर्क रहना चाहिए। अल्‍लाह हमसे भी ज्‍यादा उन सबके कल्‍याण की इच्‍छा रखता है। अपनी आत्‍मा की आवाज में विश्‍वास करें और न्‍याय के रास्‍ते से न भटकें। जीवन के हर पहलू, रिश्‍तों और बर्ताव का सामना करते हुए इस्‍लाम दूसरे समुदायों पर हमला न करने और हिंसा त्‍यागने के आदेश देता है। यह महत्‍वपूर्ण है कि हजरत मोहम्‍मद साहब तथा पवित्र कुरान में हिंसा के मसले का निपटारा करते हुए इस पर विस्‍तार पूर्वक बताया है और आतंकवाद की निंदा की है तथा यह आरोप भी लगाया है कि किसी मासूम का कत्‍ल करना बहुत बड़ा गुनाह है क्‍योंकि ऐसा करना, पूरी मानवता का कत्‍ल करना माना जाता है। यह मजहब किसी भी प्रकार के लालच या दुर्भावना आदि में न पड़ने की अपील करता है जिसके कारण हम अल्‍लाह द्वारा दिखलाए रास्‍ते से भटक सकते हैं।

सभी मुसलमानों को ऊपर बताए गए मानवीय मूल्‍यों से संबंधित सभी दिशा निर्देशों को बड़े सब्र और प्र‍तिबद्धता से रमजान के महीने में अपनाना चाहिए।

Check Also

Follow govt’s Covid norms, refrain from sacrificing forbidden animals: Arshad Madani

NEW DELHI:  Jamiat Ulema-i-Hind chief Maulana Arshad Madani has advised Muslims to perform Eid-ul-Adha prayers …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *