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सलमान अजहरी के वक्तव्य कुरान की शिक्षाओं के विपरीत हैं।

इस्लाम शांति और सलामती का मजहब है इसमें किसी भी प्रकार का कोई संशय नहीं, मानवीय संवेदनाओं और मूल्यों को संरक्षित करने के लिए इस्लाम ने बहुत नियम बनाए हैं।पवित्र पुस्तक कुरान शरीफ जिसमे प्रत्येक विषय की व्याख्या की गई है।पवित्र कुरान में जहां एक ओर धार्मिक कर्मकांडों की विस्तृत व्याख्या की गई है तो वहीं दूसरी ओर एक भी निर्दोष की हत्या को समस्त मानवता की हत्या के समान बताया गया है।इस्लाम किसी मौलवी या उपदेशक अथवा कथावाचक की कथाओं,फतवों और स्टोरी का नाम नहीं है,बल्कि सभ्य समाज को और अधिक संस्कारित करने का नाम है।

“इस्लाम” शब्द ही सलामती का परिचय देता है, तो उसके नाम पर की जा रही कोई भी हिंसक और अमानवीय बात उसका हिस्सा नहीं हो सकती।ख़ुद पैगंबर ए इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहू अलैह वसल्लम ने फरमाया (हदीस मिसकात शरीफ) कुल खिलकत अयाल उल्लाह यानी सारी मखलूक अर्थात सारे प्राणि अल्लाह का परिवार हैं।मानव जीवन को सुखमय और शांतिमय बनाने के लिए पवित्र कुरान में बारंबार वर्णन किया गया है, कुरान की सबसे बड़ी सुरह अल बकरह (2) की आयत नंबर (11,12) में स्पष्ट लिखा है।

व इज़ा कीला लहुम ला तुफसिदू फ़िल अर्दे क़ालू इन्नमा नहनो मूसलेहूनअला इन्नहुम हुमुल मुफसिदूना वला किन ला यशअरून

यानी,,”और जब उनसे कहा जाता है कि तुम ज़मीन में फसाद न मचाओ तो वो कहते हैं कि हम तो इसलाह करने वाले हैं। याद रखो यही लोग फसाद फैलाने वाले हैं लेकिन इन्हें इस बात का एहसास नहीं है।

आज तबलीग ए दीन ए इस्लाम के नाम पर तकरीबन हर फिरके का कथित धर्माधिकारी कट्टरपंथ को फैला रहा है। धर्म जागरण और अकीदा ईमान बचाओ के नाम पर नफरतों को फैलाने का काम इन तत्वों के द्वारा किया जा रहा है, और जब शांति और सौहार्द में विश्वास रखने वाले लोगों और सूफ़ी विचारों के लोगों द्वारा इनके विचारों की आलोचना की जाती है तो यह तमाम के तमाम कट्टरपंथी उन सहिष्णु विचार वाले लोगों को काफिर मुशरिक और मुनाफिक कहते हुए उनकी हत्या के फतवे तक दे डालते हैं,जबकि इस्लाम के विपरीत इनके वो फतवे और फरमान होते हैं।जबकि हदीस ए पाक में है सहीह मुस्लिम जिल्द 1 हदीस नंबर 64 एक शख्स ने पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम से पूछा कि कौन सा मुसलमान बेहतर है तो आपने फरमाया कि वो जिसके हाथ और ज़बान से दूसरा मुसलमान महफूज है, बाज़ मुफस्सिरीन ने लफ्ज़ हमसाया का भी इस्तेमाल किया है।

अब कुरान और हदीस की रोशनी में जायज़ा लेना चाहिए उन कथित धर्माधिकारियों का जो नित नए कल्पित फरमानों के जरिए गैर मुस्लिम तो दूर मुसलमानों के ही जान माल के दुश्मनी भरे फरमान जारी करते हैं।

मौजूदा परिस्थितियों में अपराधिक सोंच वाले कथित सलमान रजवी उर्फ सलमान अजहरी द्वारा जिस तरह से समाज में नफरत को फैलाया जा रहा है और फितनों को हवा दे कर लोगों की जानों को खतरे में डाला जा रहा है,नौजवानों को नामूस ए रिसालत के नाम पर बरगलाया जा रहा है क्या यह दुरुस्त है?

मुस्लिम समुदाय के धर्माधिकारियों को ख़ुद यह निर्णय लेना चाहिए कि क्या कोई व्यक्ति जो खुद को धर्मगुरु कहता है उसके द्वारा सिर्फ धर्म प्रचार की आड़ में स्वनिर्मित बातों को कुरान और हदीस की उन बातों के साथ मिलाकर भारत जैसे लोकतांत्रिक और विशालतम संविधान वाले देश में अपनी तरफ से पेश कर देना उचित है??

सवाल जरूरी है और इंसानियत की भलाई के लिए भी है, कि क्या जो कार्य और वक्तव्य सलमान रजवी उर्फ सलमान अजहरी द्वारा विगत कई वर्षों से किए जा रहे हैं वह इंसानियत और इस्लाम के मानकों के अनुरूप हैं?? हिंसा को बढ़ावा देने वाले और नौजवानों को गुमराह करने वाले सलमान अजहरी के बयान क्या खुली हुई तौहीन नहीं है इस्लाम और कुरान की।

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